Vishnu Gayatri mantra- भवसागर से तारता है ये एक मात्र मंत्र

Vishnu Gayatri

आज हम बात कर रहे है विष्णु गायत्री मंत्र का जाप क्यों करना चाहिए और इसके क्या लाभ हमारे जीवन में होने चाहिए, जैसा की हम जानते है की विष्णु भगवन के मंत्र विष्णु संप्रदाय से ही चले आ रहे है जो लोग विष्णु सम्प्रदया में होते व

Vishnu Gayatri

आज हम बात कर रहे है विष्णु गायत्री मंत्र का जाप क्यों करना चाहिए और इसके क्या लाभ हमारे जीवन में होने चाहिए, जैसा की हम जानते है की विष्णु भगवन के मंत्र विष्णु संप्रदाय से ही चले आ रहे है जो लोग विष्णु सम्प्रदया में होते वो सब इन मंत्रो का जाप करते है।

vishnu maha mantra

वो गुरु परम्परगत ही चल रहे होते है । अगर अपने दीक्षा नहीं ग्रहण की है तो आप अपने घर में विष्णु गायत्री मंत्र का जाप कर सकते है। वर्तमान समय में चतुर्मास हो या एकादशी हो या पूर्णिमा हो या अमावश्या हो उस दिन विशेष रूप से बृहस्पतिवर ही हो। उस दिन में विशेष रूप से भगवन विष्णु की ही पूजा की जाती है और उसका फल भी हमे जल्द से जल्द प्राप्त होता है।

shree vishnu mantra

ऐसे आपको भगवन विष्णु के गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। हिन्दू धर्म त्यौहार का धर्म है बिना तोयहर के दिन बिना व्यक्ति अगर दुःख में है तो वह निराश हो जाता है इसलिए आपका हिन्दू धर्म में आपका जन्म हुआ है हमारे जो धार्मिक त्यौहार होते है उनको मानना चाहिए। विष्णु भगवन से सम्बन्ध्ति ये मंत्र आज आपको बताने जा रहे है अगर आपके जीवन में कोई समस्या है किसी भी कार्य को करने में हिचकिचाते है या घर में आपके कलेश बना रहता है या नकारात्मक ऊर्जा सदैव आपके घर में बनी रहती है तो अनंत में हम सब भगवन का ही गेट खटखटे है।

vishnu mantra 108

जबकि हमे सबसे पहले भगवन के पास जाना चाहिए। हम पहले खुद के हाथ पैर मार लेते है। उसके बाद ही हम भगवन के पास जाते है केवल हम ये करते है। हम शारीरिक रूप से हम मंदिर जाते है। उनसे केवल याचना करके वापस आ जाते है। ऐसे मैभगवना भी हमरी कैसे सुनेगे जब तक अंतरात्मा भगवन से नहीं जुड़ेगी। ऐसे आपकी बात परमात्मा सुन पाएंगे ऐसे मै विष्णु गायत्री मंत्र उत्तम मणि गई है क्योकि गायत्री माता के 24 गायत्री मंत्रो में एक विष्णु भगवन भी आते है। जो 24 देवता गायत्री के मने गए है उसमे विष्णु जी का विशेष महत्व बताय गया है।

vishnu gayatri mantra benefits

अगर आप विष्णु गायत्री का जाप कर रहे है तो वो आपको सात्विक बनाएगी , नकारात्मक ऊर्ज को दूर आपसे रखेगी, सुख शांति समृद्धि धन भी आपके जीवन में लाएगी। जहा विष्णु भगवन वाश करते है। वही लष्मी जी वाश करती है। विष्णु गायत्री मंत्र क्या है ""ॐ नमो नारायण विद्महे, ॐ नारायण विद्महे, वासुदेवाये धीमहि तन्नो विष्णु परचो दयात |""

gayatri mantra

जिस प्रकार से गायत्री मंत्र होता है उसी प्रकार से विष्णु गायत्री मन्त्र है उसका भी उतना ही महत्व है।इस मंत्र का जाप करे आपको विशेष लाभ होगा।

thursday vrat katha-जानिए बृहस्पति वार व्रत कथा

thursday

आज हम आपको बृहपति वार के कथा के विषय मे बताने जा रहे है ।पुराने समय की बात है । एक राज्य मे एक प्रतापी व् दानी राजा राज्य किया करता था ।वह गुरुवार क़ो व्रत रखता था । वह भूखे व् दानी लोगो क़ो दान देकर दान प्राप्त करता था ।यह बात उस

thursday

आज हम आपको बृहपति वार के कथा के विषय मे बताने जा रहे है ।पुराने समय की बात है । एक राज्य मे एक प्रतापी व् दानी राजा राज्य किया करता था ।वह गुरुवार क़ो व्रत रखता था । वह भूखे व् दानी लोगो क़ो दान देकर दान प्राप्त करता था ।यह बात उसकी रानी क़ो अच्छी नहीं लगती थी । वह न तो दान देती थी और न ही किसी प्रकार का दान रखती थी ।

thursday vrat katha

वह राजा क़ो ऐसा करने के लिए मना करती थी । एक बार की बात है ,राजा शिकार के लिए गए थे ।महल मे सिर्फ रानी और दासी थी । उस समय बृहस्पति देव भेष बदलकर आये ।जब बृहस्पति देव ने भिक्षा मांगी । उसने कहा ,हे सादू देव महाराज मे दान भिक्षा से तंग आ चुकी हु ।उसने बृहस्पति देव से कहा ,हे साधु कोई ऐसा उपाय बताओ ।ये सारा धन नस्ट हो जाये ।

Thursday vrat

साधु ने कहा ,हे रानी तुम बहुत विचित्र हो ।पैसा और संतान से कोई दुखी नहीं होता है।अगर ज्यादा धन है। उस से कुवारी कन्याओ का विवाह कराओ ।कोई सुबह कार्य मे खरच करो ।रानी ने कहा मुझे ऐसे धन की जरुरत नहीं है ।जिसे संभालने के लिए सारा समय बर्बाद हो जाये ।साधु ने कहा जैसा मे तुम्हे बताता हु ,ऐसा करना । बृहपति वार के दिन अपने घर क़ो गोबर से लीपना ।अपने केशो क़ो पीली मिटटी से धोना।राजा क़ो हजामत बनाने के लिए कहना ।भोजन मे मॉस ,मंदिर खाना। कपड़ो क़ो धोबी के यहाँ धोने के लिए डाल देना।

How to do thursday vrat katha

ये सारा तुमको सात बृहस्पति वार करने से तुम्हारा सारा धन नस्ट हो जायेगा ।इतना कहकर बृहपति देव जो साधु का भेष रखकर आये थे । वे अंतर्ध्यान हो जाते है ।रानी 3 बृहस्पति वार के दिन यह काम करती है ।कहते बृहस्पति वार के दिन वे खाने तक के मोहताज हो जाते है ।ऐसे मे रानी बहुत चिंतित रहती है । वह कैसे अपना भरण पोषण करे ।एक बार जब रानी और दासी क़ो 7 दिन तक भोजन प्राप्त नहीं होता है ।तब वह रानी अपनी दासी क़ो अपनी बहिन के यहाँ भेजती है ।रानी जिस दिन दासी क़ो अपनी बहन के यहाँ भेजती है ।उस दिन सौभाग्य से बृहस्पति वार ही होता है।

brihaspati mantra

 रानी की बहन उस दिन अपनी बृहस्पति वार की पूजा मे मग्न रहती है ।वह दासी से नहीं मिल पाती है। यह सब किस्सा दासी रानी को सुना देती है ।किसी भी प्रकार से रानी की बहिन को यह पता लग जाता है ।

thursday pooja

दासी किसी काम से मेरे पास आयी थी जब रानी की बड़ी बहिन उनके पास पहुँचती है । वह यह देखकर पूछती है ।कैसे हुआ यह सब ।रानी ने रानी की सारी बात बता दी ।तब रानी ने कहा अगर तुमको दुबारा से धन ,ऐश्वर्य चाहिए ।तुमको उस व्रत को दुबारा से उस व्रत को करना चाहिए ।

thursday fast

तुम्हारा जो भी बुरा व्रत था । वह काट जायेगा ।अच्छा समय आएगा ।मात्र चार कथा उसने के बाद बृहस्पति देव उनके पास आते है ।कुछ याचना करते है । रानी उनको भक्ति भाव से भोजन कराती है ।भगवन विष्णु उनसे प्रसन्न हो जाते है ।उनको धन ,ऐश्वय प्रदान करते है ।इस कथा का यही महत्व है ।अगर कोई व्यक्ति बृहस्पति वार की पूजा करता है ।उसको उसका भाव जरूर मिलता है ।

Vishnu puran-जानिए विष्णु पुराण क्या है ?

Visnu puran

आज हम बात रहे है ,भगवान विष्णु के विष्णु पुराण के बारे मे बात कर रहे है । भगवन ने किस किस अवस्था मे अवतार लिए श्री वेद व्यास जी द्वारा बताया गया है । विष्णु जी के 10 अवतार के बारे मे बताया गया है ।

vishnu avtar katha

भगवन ने कहा कहा अ

Visnu puran

आज हम बात रहे है ,भगवान विष्णु के विष्णु पुराण के बारे मे बात कर रहे है । भगवन ने किस किस अवस्था मे अवतार लिए श्री वेद व्यास जी द्वारा बताया गया है । विष्णु जी के 10 अवतार के बारे मे बताया गया है ।

vishnu avtar katha

भगवन ने कहा कहा अवतार लिए ,उन्होंने सब कुछ बताया है। श्री वेद व्यास जी भगवान द्वारा बताया गया है।उनके सारे अवतार के बारे मे बताया गया है । जैस हमें देखने को मिलता है, सर्व प्रथम अवतार श्री सनक सनकनन्दन के रूप मे अर्थात भगवन ने सबसे पहले रूप मे अवतरित हुए थे।
अर्थात भगवन विष्णु ने प्रथम अवतार के रूप संत के रूप मे जन्म लिया था ।उसके बाद हमें कछक अवतार के रूप मे जन्म लिया था। जहा उन्होंने अपने कूब पर विंध्याचल पर्वत पर जन्म लिया था।

varaha avatar

उसके बाद वराह अवतार उन्होंने लिया। उसके बाद नरसिंघ अवतार उन्होने लिया ।उसके बाद प्रह्लाद की जान उन्होंने बचायी ।उन्होंने भक्ति का पूरा फल प्राप्त करवाया । उसके बाद बलि का भी मर्दन किया।उन्होंने अन्य लोक भी प्रदान किया।

Baman avatar

उन्होंने श्री बामन अवतार मे बलि के राज पाठ पर अधिपत्य कर लिया था ।भगवान ने तीनो लोको मे अपना अधिकार जमाया।उसके बाद उनके राज पाठ को लौटा दिया ।उसके बाद सभी को दर्शन दिए । उसके बाद उन्होंने अपने परशुराम अवतार मे सभी को ब्रामणतत्व का परिचय करवाया ।उन्होंने श्री राम अवतार मे उन्होंने मनोस्क्रति का अनुभव करवाया था ।मनु द्वारा मनुस्मृति का पालन करना साधारण मनुस्य के सामर्थ्य मे नहीं था। ऐसी वजह से उन्होंने भगवान से खुद उन्होंने वर माँगा । आप मेरे ही परिवार मे पुत्र पौत्र के रूप मे जन्म लेंगे।

Ram avatar

ऐसे मै उन्होंने राम अवतार भी लिया। उसके बाद भगवन ने द्वापर मे श्री कृष्णा अवतार लिया । उन्होंने ऐसे मे उन्होंने अपना संपूर्ण ऐश्वर्य दिखाया ।भगवान ने गीता का ज्ञान भी दे डाला। ऐसे मे उन्होंने कभी संजय को दर्शन दिए। उन्होंने बर्बरीक को दर्शन दिए। उन्होंने कुरुक्षेत्र मे पूरा ऐश्वर्य दिखाया। कृष्णा अवतर मे उन्होंने ऐसा ऐश्वर्य प्रदान किया जहा राम अवतार मे वे उत्तम पुरुष कहलाये गए।

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वे कृष्णा अवतार मे छलिया का रूप कहलाये गए है । उन्होंने गौतम बुद्धा का अवतार लिया।जिसमे उन्होंने काफी सारी लीलाये दिखाई। एक सत्मार्ग उन्होंने प्रदान भी किया।

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कलयुग मे यह माना जाता है ।वे अपने 10वे अवतार मे जन्म लेंगे।कलयुग मे कल्कि अवतार जन्म मे भगवन अवतरित होंगे। जिस अवतार मे यह माना गया है।जब कलयुग अपने चरम सीमा पर होगा ।वे कलयुग मे सबका मर्दन करेंगे।

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वे सबको मुक्ति भी प्रदान करेंगे। भगवन विष्णु के संपूर्ण ऐश्वर्य को बताने वाला यह विष्णु पुराण है।यह अतुल्यनीय कहलाये जाने वाला पुराण है ।हम इसको पूजते है क्योकि यह सबसे उत्तम माना गया है। पुराणों मे सबसे प्रथम पुराण स्थान प्राप्त इस पुराण को हम इसको पूजते है। आप इस मंत्र का ध्यान भी करे । भगवन विष्णु की कृपा आप पर बानी रहेंगे । माँ लक्ष्मी भी आप पर प्रसन्न रहेगी।

om namo bhagavate vasudevaya

ॐ नमो भगवते वासदेवाय