jai shree krishna-भगवान वासुदेव का एक मात्र संकट से दूर रखने का मंत्र

om namo bhagwate vasudevay namah


आज हम बात करेंगे ॐ नमः बागवते वासुदेवाय इस मंत्र को क्यों जापना चाहिए। क्या इसके लाभ आपके इस जीवन में पड़ेगे। तो जैसा की हम ऐसा जानते है। वासुदेवाय का मतलब श्री कृष्णा को बोला गया है। स्व्भविक सी बात है। ये श्री क

om namo bhagwate vasudevay namah


आज हम बात करेंगे ॐ नमः बागवते वासुदेवाय इस मंत्र को क्यों जापना चाहिए। क्या इसके लाभ आपके इस जीवन में पड़ेगे। तो जैसा की हम ऐसा जानते है। वासुदेवाय का मतलब श्री कृष्णा को बोला गया है। स्व्भविक सी बात है। ये श्री कृष्णा का मन्त्र है।


shree krishna


पुराण और ग्रथो में भगवन विष्णु के अवतार बातये गए है। श्री कृष्णा को, विष्णु पुराण के अनुसार में श्री कृष्णा को विष्णु में अवतार बताये गए है। तो जहा विष्णु की बात आ जाती है । वह वैष्णवता आ जाती है। अगर वैष्णव बोला जाता है। तो इसमें भगवन विष्णु की ही बात आ जाती है ।


bhagwan shiv


हमारे पुराण में बताया गया है की भगवन शिव से बड़ा कोई वैष्णव नहीं है क्योकि पहले शिव के पास ही हर व्यक्ति जाता है अगर कोई शिष्या, गुरु मान कर शिव के पास जाती है तो गुरु उन्हें भगवन विष्णु के पास भेजते करते है। वैसे तो परमाता तो एक ही है।


shiv and shakti


हमारे ग्रथ में बताया गया है पुरुष एक है प्रकति अनेक है तो जब पुरुष और प्रकति का जब मेल होता है तो उसके बाद ही प्रकति अपना संचार बढ़ाती है और पुरुष कौन है वही परमात्मा है। सांख्य सस्त्र में स्पस्ट रूप बतया गया है की 25 तत्वों से ही , 25 तत्व को पुरुष और 24 तत्व को प्रकति का ही रूप बतया गया है।


most powerful mantra


उन्ही से संभंधति इस मंत्र के बारे में बतया गया है इस मंत्र से हम बड़ी सरलता से भगवत प्राप्त कर सकते है और इस कलयुग में इतनी बड़ी मेहनता बताई गई है की गोस्वामी तुलसी दास जी ने अपनी राम चरित मानस में स्पस्ट बतया है कलयुग केवल नाम अधारा जपत जपत न उतराई पारा | केवल नाम ही जाप कर लेता है वह इस कलयुग ही मोह माया से दूर हो जाता है और हमे भागवत प्राप्त हो जाती है भगवन के किसी भी मंत्र का जाप करना चाहिए उसके फल स्वरुप हमे भगवत प्राप्ति होती है भगवत दर्शन होते है।


om chanting


इस मंत्र का अर्थ से है ॐ का मतलब जिस प्रकार से ब्रह्माण्ड आकाश शून्य है उसी प्रकार से ॐ का स्वरुप बताया गया है, नमो मतलब नमन इत्यादि भगवान को हम याचक के रूप में प्रणाम कर रहे है, भगवते वासुदेवाये इस का अर्थ ये है की भगवान श्री कृष्णा।


jai shree krishna


इस पुरे मंत्र का अर्थ ये है की हम उस परम पिता परमेश्वर भगवान श्री कृष्णा को प्रणाम करते है और उनको अपने हिर्दय से ये कहते है की हम उनकी सरनागति में है जिससे की आपके अंदर सात्विक प्रवति आएगी और इस कलयुग में भी भगवान को स्पस्ट रूप से देख पाएंगे। इस कलयुग में भी कई संतो को भगवान के दर्शन हुए है।


bhagwan shri krishna leela


वृन्दवन की लीलाओ के बारे में सुना ही होगा भगवान में यहाँ आकर ऐसी लीलाये की है। इस मात्रा की गुडवत्ता यही है की आप इस मंत्र से भगवान की औऱ जा रहे है। आप भगवत मार्ग की और जा रहे है। अगर आप भगवत मार्ग पर गए तो आप कल्याण होना निश्चित है । यहाँ कल्याण का भी अर्थ है जो दुःख और सुख से परे है जब आपको किसी चीज़ से दुःख और सुख नहीं होगा तो अवश्य की आपका कल्याण होगा, सुख और सुख केवल मनुष्य समझते है ये केवल हमारे मन की गति है इसलिए अगर हम अपना मन भगवान में लगते है तो निश्चित तोर पे हमे कई उप्लभ्धि प्राप्त हो जाती है, बहुत से फल हमे प्राप्त होते है और हमरा लक्ष्य भी हमे प्राप्त हो जाता है तो ऐसे में हमे इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

mantra for good health- जानिए जीवन जीने का शिव मंत्र

shiv mantra

मित्रो आज हम बात करेंगे स्वस्थ सम्भंदित अगर किसी वेक्ति के स्वस्थ बिगड़ रहा है। उसकी तबियत हनेशा ख़राब रहती है। तो वो दवाई इत्यादि तो ले ही रहा है। लेकिन अगर वो धर्म का रास्ता भी अपनाए और मन्त्र इत्यादि का जाप भी वो करता रहे

shiv mantra

मित्रो आज हम बात करेंगे स्वस्थ सम्भंदित अगर किसी वेक्ति के स्वस्थ बिगड़ रहा है। उसकी तबियत हनेशा ख़राब रहती है। तो वो दवाई इत्यादि तो ले ही रहा है। लेकिन अगर वो धर्म का रास्ता भी अपनाए और मन्त्र इत्यादि का जाप भी वो करता रहे तो अवस्य ही उसके जीवन में उसके शारीरिक बनवट में ऐसी ऊर्जा का संचार होगा। अगर वह मन्त्र जाप करता है। तो अवस्य ही वो जल्द से जल्द सवथ होगा और अस्वथा उनसे बहुत दूर चली जाएगी।

shiv mantra for health

जीवन में स्वस्थ बहुत बड़ा महत्व रखता है। अगर आप का स्वाथ अच्छा नहीं है तो आप किसी कार्य को भी नहीं कर पाएंगे। नकारत्मक प्रभाव आपके ऊपर पड़ने लगता है। अगर आप बीमारी में है तो आप के अंदर नकारत्मक प्रभाव आने लगता है। तो इसी लिए आपके अंदर आलास प्रमाद इत्यादि उस समय आपको ग्रसित करलेते है जिस समय में आप बीमार रहते है। अगर किसी के सर में दर्द हो रहा है तो वो कभी भी एक स्थान पर स्थिर हो कर नहीं बैठ सकता अगर वो बैठेगा भी या अगर वो सोने की कोसिस करेगा तो निश्चित तोर पर वह वो नहीं कर पाएगा।

shiv pooja vidhi in hindi

भगवन शिव के चरणों मैं एक बार अपना प्रणाम आपको बोलना है। क्योकि भगवन शिव सदा निरोग प्रदान करने वाले भगवन है। और सदा अपने भगतो पर कृपा बरसते है। तो ऐसे मैं उनके महा मिर्तु जेन मन्त्र का अगर नित्ये जाप करते है। विधि विधान पूर्वक तो अवस्य ही आपके जीवन में कभी भी आपको अस्वस्था नहीं देखिनी पड़ेगी सदय ऊर्जा वान आप रहेंगे। और साथ आप रहेंगे। इसका बहुत बड़ा उद्धरण आप ने देखा ही होगा। की ब्राह्मण दुवारा लोग अगर बीमार रहते है तो उसके उपचार क्र लिए रूद्र अभिसेक करवाते है। या फिर महा मिरतियूजेन का जाप करवाते है।

mahamrityunjay mantra jap

भमण देवता भी आपको यही सलाह देते है। की आप जाप करवाए डेढ़ लाख जाप करवाए ,एक लाख सवा लाख जाप करवाए आपका स्वस्थ जल्द से जल्द ठीक हो जाएगा। तो इतनी बड़ी महिमा इस महा मिरतुन्ज़ेन की है। और ये बहुत जल्द से जल्द किसी भी वेक्ति का स्वस्थ सुधरने में लाभ करि होता है। इसी लिए इस महा महा मृत्युंटजय मंत्र का आप अवस्य जाप करे। मन्त्र कुछ इस प्रकार है। आप सब ने पहले भी सुना होगा।

mahamrityunjay mantra

|| महा मृत्युंrजय मंत्र ||ॐ त्र्यम्बक यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धन्म। उर्वारुकमिव बन्धनामृत्येर्मुक्षीय मामृतात् !! ये तो मन्त्र मेने बताया। अब मैं सम्पुट के विषय मैं आपको बताता हूँ । ||

mahamrityunjaya beej mantra

संपुटयुक्त महा मृत्युंjजय मंत्र || ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बाकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धंनान् मृत्यो।र्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

mahamrityunjaya mantra jaap

इस प्रकार से ये सम्पुट लगा के भी आप इस मन्त्र का भी आप जाप करते है। तो निश्चित तोर पे आपके जीवन मैं भी आपको अस्वथ नहीं रहना होगा। स्वतः आपका सदैव उत्तम रहेगा बहुत ही अच्छा कहेगा अगर परिवार मैं भी किसी को समस्या रहती है स्वाथ की तो उसके लिए भी संकप लेकर आप भवगवान शिव को आप नित्ये जल अर्पित करे दूध अर्पित करे। गन्ने का रस अर्पित करे अन्य अन्य जूस अर्पित करे तो निश्चित तोर पे ।

maha mantra

आपके जीवन मैं कभी भी अस्वथा नहीं रहेगी। आप सदैव स्वाथ महसूस करेंगे ऊर्जा वान महसूस करेंगे। ऐसी भगवन भोले नाथ की कृपा है। अब विधि सुन लीजिए। किसी भी सोमवार से आपको इसे प्रारम्भ करना है। भगवन शिव के मंदिर आपको जाना है। अगर वहां पॉसिबल नहीं हो पता है। तो अपने घर मैं ही शिव जी की प्रतिमा के समक्ष विराजमान हो कर गंगा जल हाथ मैं लेकर आप संकप लेंगे की है परम पिता परमेस्वर मैं अस्वस्थ रहता हूँ । मुझे ये बीमारी है।

maha mantra for success

भगवन भूत भवन भोले नाथ अपनी कृपा मुझ पर बरसाए मुझे स्वाथ बनाए और वह जल भूमि मैं छोड़ने के बाद आसन पर आप विराजमान है और अपने को पवित्री कारन करने के बाद आप रुद्राक्ष माला से इस मन्त्र का एक माला रोज अवयस्क आप करेंगे । किसी भी सोमवार से आप प्रारम्भ आप क्र सकते है और किसी भी सोमवार को आप जब अटक आपकी छमता है। जब तक आप स्वाथ महसूस नहीं करते है। तब तक आप इसको जप्ये। निष्ठा भाव से आप जप्ये भगवन शिव को आप मन में रख कर जप्ये । तो निश्चित तोर पे आपका स्वाथ सदैव आपका साथ देगा और कोई भी कार्य आप बड़ी आसानी से आप कर पाएंगे।

shiv pooja vidhi

ऐसी भूत भवन भोले नाथ की कृपा है सभी के ऊपर एक लोटा जल से वो प्रश्न वो हो जते है । आप भी करे और किसी भी सोमवार से आप प्रारम्भ करे और जब आप समाप्त आप कर रहे हो इस प्रकिर्या को तो आप किसी सोमवार को ही आप चुने अथवा त्रियो दासी तिथि को ही चुने । उस दिन इसका उत्थापन भी आप करे। उत्थापन अर्थार्थ इसको सम्पत करने के बाद ब्रामण भोज भी आप करवाए और दछणा दान उसको देकर उसको घर से विदा करे। ऐसा उठापन किया जाता है। अपने जिस चीज के लिए संकल्प लिया वह चीज आपकी सम्पत हो चुकी है और आप स्वाथ महसूस कर रहे होंगे और उसको नियन्त्र भी रखते है तो आजीवन आपको कवी स्वाथ सम्भंदित परेशानी नहीं आएगी। ऐसी ऊर्जा मन्त्र मैं होती है। और विषेस इस महा मूर्तिओंजें मन्त्र मैं होती है । तो इसका लाभ आप उठाए।

Shiv Tandav -जानिए शिव तांडव के बारे मे

Shiv tandav

शिव के कुछ श्लोक शिव तांडव स्त्रोत के नाम से जानते है। कहते है इन श्लोको मे इतनी शक्ति है।कितनी भी बड़ी परेशानी हो उस परेशानी को दूर किया जा सकता है।

shiv tandav stotram by ravana

इसकी स्तुति से कितनी भी बड़ी समस्या हो उसका समाधान किया

Shiv tandav

शिव के कुछ श्लोक शिव तांडव स्त्रोत के नाम से जानते है। कहते है इन श्लोको मे इतनी शक्ति है।कितनी भी बड़ी परेशानी हो उस परेशानी को दूर किया जा सकता है।

shiv tandav stotram by ravana

इसकी स्तुति से कितनी भी बड़ी समस्या हो उसका समाधान किया जा सकता है ।इन श्लोको के द्वारा कलात्मक व् रचनातमक क्षेत्र मे उपलब्धि पायी जा सकती है ।जिन शिवजी की जटाओ मे अतिवेग से माँ गंगा विलासपूर्वक ब्रामण कर रही। देवी गंगा की लहरों वेगपूर्वक उनके शीश पर लहरा रही है । शिव जी के माथे पर अग्नि की ज्वाला दहक रही है ।बाल चन्द्रमा से भिभूषित शिवजी हम सब का अनुराग प्रतिक्षण बढ़ाते रहते है ।इस तांडव के श्रवण मात्र से हमारी सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।अगर पाठ किया जाये ।जीवन मे किसी प्रकार की कमी नहीं रहती है । चलिए जानते है शिव तांडव के बारे मे। शिव तांडव इस प्रकार है।

shiv tandav stotram

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥

shiv tandav stotram lyrics

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥

shiv tandav in hindi

धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।

shiv tandav stotram lyrics in english

कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

shiv tandav stotram lyrics in hindi

जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।
मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥

shiv tandav stotram powerful

सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥

shiva tandava stotram powerful

ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।
सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥

shiv mahimna stotra

कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥

Shiva tandav

नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।
निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

Shiv stotram

प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥


shiva shiva

अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥


shiva Shiva Shankara

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-
धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥


lord shiva

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

lord shiva devotional

कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌कदा सुखी भवाम्यहम्‌॥13॥

LORD SHIVA STHOTHRAS

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥

lord shiva om chanting

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥

shiv panchakshar stotra with lyrics

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥

shiv panchakshar stotra

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥

Shiv tandav mantra

इस तांडव मंत्र के श्रवण से ही सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। आप भी शिव तांडव स्त्रोत का पाठ करे ।शिव तांडव का श्रवण करे ।आपकी सभी मनोकामना पूरी होगी।

Shivashtakam- जानिए शिवाष्टकम के बारे मे

shri shivastak

आज हम आपको शिवाष्टकम ऐसे मंत्र के बारे मे बताने जा रहे है ।जिस मंत्र को सुनाने मात्र से आपका उद्धार हो जायेगा ।भगवन शिव से इस शक्ति को पाने के लिए उन्होंने तपस्या करी ।इस मंत्र को रावण ने भगवान शिव को खुश करने के लिए किया

shri shivastak

आज हम आपको शिवाष्टकम ऐसे मंत्र के बारे मे बताने जा रहे है ।जिस मंत्र को सुनाने मात्र से आपका उद्धार हो जायेगा ।भगवन शिव से इस शक्ति को पाने के लिए उन्होंने तपस्या करी ।इस मंत्र को रावण ने भगवान शिव को खुश करने के लिए किया था। शिवजी को पता था रावण यह तपस्या गलत काम करने के लिए कर रहा है।शिव को पता था यह अधर्म है । इस मंत्र का नाम शिवाष्टकम है ।

SHIVASHTAKAM

नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम्॥ निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् । करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम् ॥

shivashtakam with lyrics

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्। स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥ चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्। मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥

powerful lord shiva mantra

प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम् । त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम्॥

Powerful Shiva Mantra

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी। चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।

Devotional Mantra

न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं, प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥

Shiv mantra

न जानामि योगं जपं नैव पूजा, न तोऽहम् सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम्। जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥

shiva mantras

रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।। यह नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम् ॥

shivashtakam mantra

निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् । करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम् ॥

shivashtakam stotram

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् । स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥

shiva stotras

चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् । मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम् । त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम्॥

lord shiva mantra

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी। चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥

shiva

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् । न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं, प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥

om

न जानामि योगं जपं नैव पूजा, न तोऽहम् सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम्। जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥

om shiva

रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।। यह नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम् ॥

mahakaleshwar

निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् । करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम् ॥

mahakaal

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् । स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥ चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्। मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥

mahakal

प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम् । त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम् ॥

mahakal shiva

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी। चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥

mahakaleshwar mantra

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् । न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं, प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥

Mahakal Vandana

न जानामि योगं जपं नैव पूजा, न तोऽहम् सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम् ।जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥

Shiva Stotra

रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।। यह शिवाष्टकम है ।

om namah shivaya in hindi- जानिए भगवन शिव को खुश कैसे करे

om namah shivaya

अगर आप सदा जीवन मे परेशान रहते है । अगर आप परेशानी से जूझ रहे होते है । घर मे कलह क्लेश बना रहता है । पत्नी से झगड़ा हो जाये । आप परेशान हो जाते है । अगर ऑफिस मे कोई भी बात हो जाये । कोई भी गलत सोच रहा होता है । व्यापर का ना चलना

om namah shivaya

अगर आप सदा जीवन मे परेशान रहते है । अगर आप परेशानी से जूझ रहे होते है । घर मे कलह क्लेश बना रहता है । पत्नी से झगड़ा हो जाये । आप परेशान हो जाते है । अगर ऑफिस मे कोई भी बात हो जाये । कोई भी गलत सोच रहा होता है । व्यापर का ना चलना । समस्याएं जीवन से जुडी होती है । इसका हल बहुत ही सिंपल है। शिव एक लोटा जल से प्रसन्न हो जाते है। कोई भी व्यक्ति एक लोटा जल से अभिषेक करता हैं । भगवन शिव प्रसन्न हो जाते है । भगवन शिव के ऊपर भांग ,धतूरा ,बेल पत्र चढ़ाया जाता है । जो भी उनपर अर्पित करता है । भगवन शिव प्रसन्न हो जाते है । उसका जीवन धन्य बनाते है ।

om namah shivaya mantra

ॐ नमः शिवः

om namah shivaya hara hara bole namah shivaya

आज हम बात करने जा रहे है दिव्या मंत्र के बारे मे। यह शिव का पंचतर मंत्र के बारे मे बात कर रहे है । आप सभी ने ॐ नमः शिव मंत्र के बारे मे सुना होगा । आपको इस मंत्र का पूरा मतलब नहीं पता होगा । यह ब्रह्माण्ड का जोतक है। आप सभी ने शिव पञ्चकतर मंत्र के बारे मे सुना होगा । भगवन शिव के मंत्र का मतलब नकाराय है । अगले मंत्र का मतलब मकाराय होता है । जो मिलकर नमः बनता है । उसके बाद शिकाराय सिद्ध होता है । उसके बाद वकाराय व् उसके बाद शिकाराय होता है ।

om namah shivaya om namah shivay har har

अगर आप शिव मंत्र का जाप करेंगे । भगवन शिव पर नित्य जलभिषेक करेंगे । अवश्य ही आपके जीवन से कास्ट दूर होंगे । नयी मंजिलो को छू पायेगा । आप सभी ने प्रत्येक बार वीडियो मे देखा भी होगा । भगवन शिव से सम्बंधित टोटके व् उपाय बताये जाते है । उसका एक विशेष महत्त्व होता है ।

om namah shivaya jaap

ऐसे मे भगवान शिव पर पञ्चकतर मंत्र से जाप करते हुए जलभिषेक करे । बेल पत्र व् धतूरा लेकर भगवान शिव को प्रसन्न करे । अगर आप इन चीजों को अर्पित करते है । भगवान भूतभावन भोलेनाथ कृपा बरसते है । आपके सभी कस्तो को दूर करते है । हमारे धरम गत्रणतो के अनुसार । यह मन जाता है । भगवान शिव ही ऐसे भगवान है जो हर किसी की मनोकामना को पूर्ण करते है । ऐसे मे हमें अवस्य ही भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए ।

solah somvar vrat katha

ऐसे मे अगर आपके पुत्र का विवाह नहीं हो रहा है । पुत्री का विवाह नहीं हो रहा है। उसमे भी भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामना पूर्ण होती है । अगर आप 16 सोमवार का व्रत करते हो ,आपकी मनोकामना पूरी होती है । अच्छा वर व् वधु उसको प्राप्ति होती है ।

maha shivratri-जानिए महा शिवरात्रि से जुडी कथा

shivratri

हमारे हिन्दू धरम मे फाल्गुन मॉस का विशेष महत्व है ।होली जैसे त्यौहार इसी महीने मे आते है ।इस महीने मे महाशिवरात्रि भी मनाया जाता है ।आज मे आपको बताऊंगा महाशिवरात्रि क्यों मनाया जाता है ।महाशिवतरि क्यों मनाई जाती है ।

shivratri

हमारे हिन्दू धरम मे फाल्गुन मॉस का विशेष महत्व है ।होली जैसे त्यौहार इसी महीने मे आते है ।इस महीने मे महाशिवरात्रि भी मनाया जाता है ।आज मे आपको बताऊंगा महाशिवरात्रि क्यों मनाया जाता है ।महाशिवतरि क्यों मनाई जाती है ।

shivratri kab hai

महाशिवतरि का शिव से क्या सम्बन्ध है ।क्या चढ़ाने से महादेव प्रसन्न हो जाते है ।ये जान लेना बहुत जरुरी है ।फाल्गुन विक्रम सम्वत का बाहरवा और चंद्र मास और ग्यारवा स्वर्ण मास है । वसंत ऋतू का महीना मे फाल्गुन मे आता है ।भारतवर्ष मे न तो ज्यादा ठण्ड व् गर्मी होती है।

shivratri 2019 date

भारतवर्ष मे बहुत अच्छा मौसम है ।महाशिवरात्रि क्यों मानते है ।महाशिवरात्रि की क्यों पूजा करते है ।महाशिवरात्रि की इसीलिए पूजा करते है ।एक बार अपने वर्चस्य को लेकर ब्रह्मा और नारायण को लेकर भयंकर युद्ध हो गया ।मेरी पूजा पहले होनी चाहिए ।

mahashivratri sadhana

उस समय एक ऊर्जा उत्पन्न हुए ।उस ऊर्जा ने कहा जो भी कोई मेरी अंत छोर तक पहुंचेगा ।वही पूज्य होगा ।नारायण पाताल की ओर प्रवेश किए व् ओर ब्रम्हा जी हंस के रूप मे आकाश की ओर ।जब ब्रम्हा जी प्रस्थान कर रहे थे ।वह केतकी का फूल गिरता हुआ नज़र आया ।जब उन्होंने बोला केतकी से क्या यह अंत है ।उस फूल ने बोला यह इस लिंग का मध्य भाग है ।उन्होंने केतकी से बोला जब नारायण जब पूछे तब बता देना मे प्रारंभ से गिरता हुआ आ रहा हूँ । नारायण ने यह मान लिया ।वह ब्रह्मा जी की पूजा करने लगे।

maha shivaratri 2019

तभी भगवन शिव क्रोधित हुए वह लिंग से प्रकट हुए ।बताते है ब्रम्हा जी के ६ मुख है ।जिस मुख से उन्होंने जुठ बोला था ।उस मुख को शिवजी ने हटा दिया था।उस दिन फाल्गुन मास के चतुर्दशी के दिन रात्रि को शिवरात्रि मनाई जाती है ।उस दिन नारायण ओर ब्रम्हा जी ने शिवलिंग की स्थापना करि थी।

Maha shivratri

उस दिन से यह रात्रि शिवलिंग के रूप मे मनाई जाती है ।कहते है उस दिन भगवन शिव शिवरात्रि वाले दिन पृथ्वी पर विचरण करते है ।जो भी भक्त सच्चे दिल से मनोकामना मांगते है ।वह मनोकामना पूर्ण हो जाती है ।उस दिन आप केतकी का फूल जरूर चढ़ाये शिवलिंग पर।आपकी सभी मनोकामना पूर्ण होगी।

shiv ko prasan karne ka mantra-जानिए शिव को प्रसन्न करने का मंत्र

shiv mantra

आज मे आपको बताऊंगा शिव पंताक्षर मंत्र के क्या क्या फायदे है ।सारी इछाये पूर्ण हो जाती है।सांसारिक बंधनो से जुड़े हुए है।

Om namah shivah

इंसान के मन की कामना के लिए स्वम शिव ने ॐ नमः शिव मंत्र का प्रतिपादन किया ।इस मंत्र को पं

shiv mantra

आज मे आपको बताऊंगा शिव पंताक्षर मंत्र के क्या क्या फायदे है ।सारी इछाये पूर्ण हो जाती है।सांसारिक बंधनो से जुड़े हुए है।

Om namah shivah

इंसान के मन की कामना के लिए स्वम शिव ने ॐ नमः शिव मंत्र का प्रतिपादन किया ।इस मंत्र को पंताक्षरी मंत्र भी कहते है ।भगवन शिव ने कहा से यह मंत्र सबसे पहले मेरे मुख से निकला है । यह मंत्र मेरा प्रतिपादन करने वाला है ।

Shiv Panchakshar Mantra

पंताक्षर तथा शरणक्षर मंत्र भाव व् भाव वाच्या है ।यह पंताक्षर व् शिव वाच्या होने से सिद्ध है ।ऐसी वजह से मनुष्य को नित्य पंताक्षर मंत्र का जाप करना चाहिए ।यह मंत्र ॐ नमः शिवाय का एक स्त्रोत है ।इस स्त्रोत का पाठ कीजिये । इस स्त्रोत से अपने मन की मनोकामनएं पूर्ण कीजिये।

shiva mantras

इस मंत्र से आप धन धान्या से सुखी हो सके । आएंगे जानते है पंताक्षर मंत्र के बारे मे ।यह शिव का पंताक्षर मंत्र है । हर शब्द पर एक स्त्रोत का रचना किया गया है ।इस स्त्रोत का बहुत ही बढ़िया रचना किया गया है ।
हर शब्द पर एक स्त्रोत का रचना किया गया है ।इस स्त्रोत का बहुत ही बढ़िया रचना किया गया है ।वह स्त्रोत इस प्रकार है ।

nagendra haraya trilochanaya

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मै न काराय नमः शिवायः॥

shiva panchakshari mantra

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय। मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मै म काराय नमः शिवायः॥
शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय। श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नमः शिवायः॥

shiva panchakshari stotram

वसिष्ठ कुम्भोद्भव गौतमार्य मुनींद्र देवार्चित शेखराय। चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै व काराय नमः शिवायः॥
यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय। दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै य काराय नमः शिवायः॥
पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत् शिव सन्निधौ। शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

shiva panchakshari

||इति श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम्|

Panchakshar Mantra

यह पंताक्षर मंत्र को नियमित रूप से पाठ करे ।आपकी मनोकामना पूर्ण होगी । आपके दुःख के कारण का विनाश करेंगे ।

lord shiva mantra-जानिए भगवन शिवा का दिव्या मंत्र

Lord shiva

जैसा हम जानते है । भगवन शिव से सृस्टि की उत्पत्ति हुए है । हमें व्याकरण शास्त्र मे जो 14 सूत्र मिले है ,भगवान शिव के डमरू से ही मिले है ।अर्थात जो हमें अक्षरों का ज्ञान प्राप्त हुआ है । भगवन शिव के द्वारा ही हुआ है। इसीलिए अगर

Lord shiva

जैसा हम जानते है । भगवन शिव से सृस्टि की उत्पत्ति हुए है । हमें व्याकरण शास्त्र मे जो 14 सूत्र मिले है ,भगवान शिव के डमरू से ही मिले है ।अर्थात जो हमें अक्षरों का ज्ञान प्राप्त हुआ है । भगवन शिव के द्वारा ही हुआ है। इसीलिए अगर हम शिव का जाप अपनी वाणी से करते है ।उसका विशेष फल प्राप्त हुआ है ।इसमें विशेषता यह है ।

rudra shiva

जो भी विद्या प्राप्त करते है ।उन लोगो को भगवन शिव की पूजा करनी चाहिए इस मातृलोक मे एक ऐसे भगवान है ,जो सिर्फ एक लोटा जल से प्रसन्न हो जाते है ।अपने पुराणिक काल की कथाये सुनी होगी ।राक्षक शिव की पूजा करते थे ।वे लोग महादेव और ब्रह्मा जी की पूजा करते थे ।जब भी वो लोग विष्णु जी की पूजा करते थे ।उनको उस पूजा का फल प्राप्त करने के लिए बहुत सारा समय लगता था ।

lord shiva story

अंतता हर इंसान की जगह बैकुंठ लोक ही रहनी चाहिए ।जब मरतुलोक मे अपने जन्म लिया ।भगवान प्राप्ति ही आपका अंतिम लक्ष्य है ।अगर आप सभी चीजों को लेकर चल रहे है ।भगवन शिव ही आपको वह तक पहुंचाते है ।भगवन शिव आपको वो चीज दिखा देते है ।जिनका आप भोग कर लेते है ।

shiv puran

वह उसका अंत कर देते है ।जो आपके भीतर विद्यमान है । अर्थात काम ,लोभ ,मोह आदि ।जो भी मनुस्य के विकार है ।उसको भी महादेव ख़त्म कर देते है ।आप लालच के माद्य से इन चीजों मे आ जाते है ।ऐसी वजह से आप गति नहीं पा पाते है ।

shiva katha

हमारे पुराणों मे ऐसे कथाये भी है ।चाहे वो शिव पुराण मे हो या ।विष्णु पुराण मे हो । ऐसे हमारे 18 पुराण मे है ।ऐसे मे अलग अलग तरके से कथाये भी बताये गयी है । ऐसे मे मै आपको एक मंत्र बताने जा रहा हु ।मे आपको विधि भी बताऊंगा ।कितनी माला आपको जाप करना है । वह मंत्र इस प्रकार से है ।

om tatpurushaya vidmahe mahadevaya dhimahi

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि ! तन्नो रूद्र: प्रचोदयात !

Lord shiva jaap

अगर आप मंदिर जाकर मंत्र का जाप करते है ।शिवलिंग के पास बैठकर यह मंत्र का जाप करे। शिवलिंग के पास बैठकर दीपक जलाकर इस मंत्र का जाप करे ।

parad shivling

अगर आप 5 माला जाप कर सकते है । जाप करे अथवा 11 माला का जाप करे ।शिवलिंग चाहे नर्मदेश्वर शिवलिंग है या पारद शिवलिंग है ।उस शिवलिंग के पास बैठकर जाप करे । आपको शिव की कृपा अवश्य प्राप्त होगी । आपको शिव की कृपा अवश्य प्राप्त होगी । आपका जीवन सदा सुख मे व्यतीत होगा ।

pradosh vrat katha-जानिए प्रदोष व्रत कथा के बारे मे

Pradosh katha

आज हम बात करेंगे प्रदोष व्रत के बारे मे ,यह व्रत साल मे दो बार आता है । प्रदोष व्रत के दिन भगवन शिव और मा पार्वती की पूजा करि जाती है ।यह व्रत महीने मे दो बार एक बार शुक्ल पक्ष और कृष्णा पक्ष आते है ।

pradosh vrat kab hai

प्रदोष व्र

Pradosh katha

आज हम बात करेंगे प्रदोष व्रत के बारे मे ,यह व्रत साल मे दो बार आता है । प्रदोष व्रत के दिन भगवन शिव और मा पार्वती की पूजा करि जाती है ।यह व्रत महीने मे दो बार एक बार शुक्ल पक्ष और कृष्णा पक्ष आते है ।

pradosh vrat kab hai

प्रदोष व्रत भगवन शिव की कृपा पाने के लिए सबसे अच्छा व्रत माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत से सरे संकटो का नाश हो जाता है।

pradosh vrat 2019 dates

हमारे पंचांग के अनुसार हर माह के त्रयोदशी के दिन मनाया जाता है। यह व्रत दोनों शुक्ल पक्ष और कृष्णा पक्ष के दिन मनाया जाता है ।प्रदोष व्रत का ऐसा महत्व है । यह किसी विशेष तिथि के आने पर अच्छा होता है ।

Lord shiva

इसका फल शुभ हो जाता है ।यह व्रत भगवन शिव का बहुत फलदायी माना गया है ।इस तिथि मे भगवन शिव की पूजा करने से पाप का नाश होता है । इस व्रत के त्रयोदशी के दिन भगवन सूर्यदेव को अर्ग देना चाहिए । नित्य कर्मो से निवृत होकर पुरे दिन मे फलाहार ही करे या गौ का दूधपान करना चाहिए ।पुरे दिन उपवास करना चाहिए । गाए के गोबर से लेपकर पुरे मंडप के शुद्ध कर ले। सूर्यास्त से पहले स्नान आदि स्वेत वृस्त दान करने चाहिए । व्रती पांच रंगो से रंगोली बनाकर पूजा स्थल को सजा ले ।निर्माण करने के बाद व्रती भगवन सनकार का पूजन करे ।

Om namah sivah

प्रदोष व्रत के लिए भगवन शिव के महामंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करे ।भगवन शिव के जल अर्पित करे । व्रती को प्रदोष व्रत करने से भगवन शिव की अपार कृपा प्राप्त होती है। प्रदोष व्रत के करने से कोई भी संकट नहीं आता है । यह व्रत बहुत ही फलदायी माना जाता है ।

Pradosh vrat katha

इस व्रत के करने से हर प्रकार के दोष मुक्त हो जाते है ।इस व्रत को अविवाहित युवक युवती करे । इस व्रत से योग्य वर वधु प्राप्त हो जाते है ।प्रभु भगवन शिव संकर ज्ञान और मोक्ष के दाता है ।ऐसे युवक युवतियों को यह व्रत करना चाहिए जो भगवन संकर से कोई मनोकामना रखते है ।

trayodashi vrat katha

इस मनोवृत को 11 त्रयोदशी या 26 दशी तक रखना चाहिए ।उसके बाद इसका उद्यापन भी करना चाहिए । इस व्रत का उद्यापन हमेशा त्रयोदशी के ही किया जाता है । भक्त को उद्यापन से एक दिन पहले रात मे कीर्तन करना चाहिए ।भक्त के पूजा के लिए मंडप बनाना चाहिए ।

How to do pradosh vrat

अब प्रदोष व्रत का उद्यापन कैसे कर सकते है ।मंडप को वस्त्र से सजा ले । उसका बाद भगवन शिव के मंत्र का 108 बार जप करे । भक्त को हवन मे आहुति हेतु खीर का प्रयोग करना चाहिए । उसके बाद । उसके बाद भक्त के लिए शांति पाठ करना चाहिए । भक्त के दो ब्राह्मणो को भोजन करवाना चाहिए। उनको दान भी देना चाहिए । प्रदोष व्रत के बारे एक कथा है ।

pradosh vrat

प्रदोष व्रत कथा ,स्कंध पुराण के अनुसार एक गांव मे एक विधवा औरत थी। वह आपने पुत्र के साथ भिक्षा लेने के लिए जाती थी । वह संध्या होते होते घरवापस लौट आती थी । एक बार जब वह घर लौट रही थी।

pradosh vrat story

उसको नदी के किनारे एक सुन्दर बालक दिखाई दिया । वह बालक विधर्व देश के राजकुमार धर्मगुप्त थे ।शत्रुओं ने उनके पिता को मारकर उनका राज्य छीन लिया था । उस ब्राह्मणी ने दोनों बालको को पाला पोषा और बडा किया। उन बालको के साथ लेकर देवयोग से मंदिर गयी । उसकी भेट ऋषि सांडिल्य से हुए। उस ऋषि ने बताया यह बालक विधर्व देश के राजा के पुत्र धर्मगुप्त है । उस ऋषि ने उस औरत को प्रदोष व्रत करनी की आज्ञा दी।

pradosham mantra

ऋषि की आज्ञा से उन्होंने प्रदोष व्रत किया । बालको ने भी प्रदोष व्रत किया ।एक बार जब वो बालक वन मे घूम रहे थे । उन दोनों के कुछ गंदर्व कन्यांए दिखाई दी ।ब्राह्मण बालक तो घर लौट आया । राजकुमार धर्मगुप्त अंशुमति नामक कन्या से वार्तालाप करने लगे । धर्मगुप्त और वो कन्या एक दूसरे
पर मोहित हो गए । उस कन्या ने धर्मगुप्त के आपने पिता से मिलवाने हेतु वह पर बुलवा लिया ।

pradosham story

भगवन शिव की आज्ञा से राजा ने धर्मगुप्त का विवाह अपनी कन्या से कर दिया । इस प्रकार के धर्मगुप्त के अपना पूरा राज पाठ प्राप्त हुआ । उसने आपने ससुर की सेना लेकर अपना राज्य पुनः पा लिया।

pradosh vrat

उसको यह सब प्रदोष व्रत करने से प्राप्त हुआ ।उसको सब सुख सौभाग्य प्राप्त हुए । जो भी भक्त स्कन्द पुराण के अनुसार प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजा के बाद प्रदोष व्रत कथा सुनता है ।उसको सौ जन्मो तक दरिद्रता नहीं देखनी पड़ती है ।

shiv gaytri mantra-जानिए शिव गायत्री मंत्र क्या है ?

mahadev

आज हम बात कर रहे है भूतभावन भोलेनाथ के बारे मे। आपने सुना होगा महादेव के गायत्री मंत्र के बारे मे। आप जानते है महदेव एक लोटा जल से प्रसन्न हो जाते है । महादेव जल्दी से प्रसन हो जाते है । अगर आप महादेव के गायत्री मंत्र का जाप क

mahadev

आज हम बात कर रहे है भूतभावन भोलेनाथ के बारे मे। आपने सुना होगा महादेव के गायत्री मंत्र के बारे मे। आप जानते है महदेव एक लोटा जल से प्रसन्न हो जाते है । महादेव जल्दी से प्रसन हो जाते है । अगर आप महादेव के गायत्री मंत्र का जाप करते है। आपकी मनोकामना पूरी होगी । अपने घर मे बैठकर कर सकते है ।अगर मंदिर बहुत दूर है । अगर आपने गायत्री मंत्र के बारे मे सुना होगा ।आपको पता होगा इस मंत्र मे कितनी शक्ति होगी । भगवन शिव को अगर आप जल्दी से जल्द प्रसन्न करना चाहते है। इस मंत्र को करे ।आपकी मनोकामना पूरी होगी ।

om tatpurushaya vidmahe mahadevaya dhimahi

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥


Gaytri mantra

इस गायत्री मंत्र के जाप करने से जन्म जन्म के पाप मिट जाते है। वही भगवान शिव उस घर मे विधमान रहते है ,जिस घर मे यह गायत्री मंत्र का जाप होता है । आप जानते होंगे जिस समसान मामकोई जाना नहीं चाहता है। उस जगह भगवन शिव बैठे रहते है।


lord shiva story

अगर आप साक्षात्कार करते है। आप डर जाते है। कहा जाता है। भूतभावन भोलेनाथ का वह स्वरूप्प देखना हर किसी के वश मे नहीं है । भगवन भोलेनाथ लिंग के रूप मे पूजे जाते है । इसीलिए हम उनको शिवलिंग के रूप मे पूजते है।

shiva puja vidhi

आप उनका पूजन करे । आपके सभी पाप खत्म हो जायेंगे आपको मे विधि बताने जा रह हु। आपकिसी भी त्रियोदशी से करे। त्रयोदशी तिथि बहुत शुभ मानी जाती है ।ऐसे मे ऐसी दिन आप प्रारंभ करे । सोमवार के दिन भगवन सूर्य को अर्ग देकर ,आप यह पूजन शुरू करे ।अगर भगवन शिव की प्रतिमा राखी है।उनके समक्ष बैठे। गंगाजल से पवित्रीकरण करे ।

puja karne ki vidhi

आप रुद्राक्ष की स्वच्छ माला से जाप करे । अगर आपके पास समय रहता है। आपको इसका विशेष फल देखने को मिलेगा