ahilya story from ramayana in hindi- जानिए रामायण मे अहिल्या की कहानी क्या है ?

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रामायण से हमारे यहाँ हर बच्चा बच्चा वकिव है। रामायण की कहानी बहुत ही रोचक व् सच्ची है।ऐसे ही एक कथा जुडी हुए है । एक जीवित स्त्री और पत्थर के बारे मे यह कथा आधारित है ।कहा जाता है ,यह पत्थर कोई ओर नहीं बल्कि अहिल्या थी। वे श

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रामायण से हमारे यहाँ हर बच्चा बच्चा वकिव है। रामायण की कहानी बहुत ही रोचक व् सच्ची है।ऐसे ही एक कथा जुडी हुए है । एक जीवित स्त्री और पत्थर के बारे मे यह कथा आधारित है ।कहा जाता है ,यह पत्थर कोई ओर नहीं बल्कि अहिल्या थी। वे श्री राम के स्पर्श से एक सुन्दर स्त्री मे बदल गयी थी ।ये प्रसन्न उठता है ,अहिल्या कैसे एक पत्थर बन गयी। इसका तथ्य हमें हमारी पौराधिक कथा से मिलता है।

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पौराणिक कथा के अनुसार हर कड़ी एक नयी कड़ी बनाते हुए जाती है। अहिल्या की कहानी कुछ इस प्रकार से है। पौराणिक कथा के अनुदार अहिल्या ऋषि गौतम की पत्नी थी।

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ज्ञान मे अनुपम अहिल्या सौंदर्य की प्रतीक थी । आपने अतुल्य सौन्दय के कारण वे आपने पति की प्रिय थी। ऐसी वजह से उन्हें सती अहिल्या भी कहा जाता है । वे अपने पति व् पत्नी धर्म का पालन बहुत अच्छे से करते थे। एक दिन उनको बुरी नज़र लग गयी । यह बुरी नज़र ,देवराज इंद्रा की थी ।

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देवराज इन्द्र अहिल्या के सौंदर्य पर मोहित था ।वह हमेश से किसी ऐसे मौके की फ़िराक मे रहता था। जब ऋषि गौतम कही बाहर जाये। इन्द्र को महर्षि गौतम की शक्ति का ज्ञान था। इन्द्र अहिल्या के प्रतिनिष्ठय से वाकिफ था ।इन्द्र के पास इन शक्तियों के पार पाने का कोई रास्ता नहीं था ।वह अहिल्या को बुलाना भी नहीं चाहता था। समय अपनी गति से चल रहा था। एक दिन ऋषि गौतम ने अहिल्या से उन्होंने कहा एक सिद्दी की प्राप्ति के लिए ,मै एकांत वास् के लिए जंगल मे जा रहा हूँ ।

Rishi gautam

अहिल्या ने उन्हें सहमति देते हुए ,ऋषि वह से चले गए । इन्द्र कुछ ऐसे ही करने की फ़िराक मे था । जैसे ही इन्द्र ने देखा ऋषि गौतम तपस्या करने के लिए जा रहे है । उनके सौंदर्य पास ने वन मे जाना संभव से असंभव बना दिया है । वे वापस आ गए । एक बार इन्द्र ऋषि का रूप धरे सो रहे थे । उनको अचानक से अनर्थ का ज्ञान हो गया था । उसने देखा ऋषि गौतम सामने से आ रहे है ।उनको बहुत अनर्थ का ज्ञान हुआ था । वह एक पत्ते की तरह कांपते हुए ऋषि गौतम के पैरो मे गिर गयी थी।
तब तक इन्द्र को भी ऋषि गौतम के आने की खबर लग गयी थी। इन्द्र तुरंत भाग लिया था ।अहिल्या से सारा वर्तान्त जानकर ऋषि गौतम सारा मामला समझ गए थे। ऋषि गौतम बहुत क्रोधित हुए।उन्होंने श्राप दिया ,जिस स्त्री को अपने पति का भान न हो । वह तन ओर मन से पत्थर की होगी।ऐसे स्त्री किसी पत्थर से कम नहीं हो सकती है। तू भी पत्थर की बन जा ।

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ऋषि के श्राप और अहिल्या अपनी अज्ञानता से ऋषि गौतम की पत्नी पत्थर की बन गयी थी ।
ऋषि गौतम को अहिल्या ने कहा ,आप दिव्य शक्तियों से समपन्न हो । आप मुझे अकेला छोड़कर गए। आपको यह पता नहीं चला। कोई छल कर रहा है।

ahilya ki katha

भले ही मै पराये पुरुष के साथ रही हूँ। मैने आपको जानकर अपनाया था। मेरा मन पवित्र है । मै तन और मन दोनों से अपने पति के साथ थी । ऋषि गौतम अहिल्या से सहमत हुए।ऋषि ने श्राप दे दिया था । उन्होंने कहा यह वापस नहीं लिया जा सकता है ।त्रेता युग मै भगवन श्री विष्णु श्री राम का अवतार लेंगे। वे वनवास के दौरान तुमको स्पर्श करेंगे । ऋषि के श्राप के बाद अहिल्या पत्थर की बन गयी। श्री राम के पवन चरणों के स्पर्श से वे धन्य हुए उनके स्पर्श से तुम दोबारा स्त्री मै बदल जायेगी।