Parsuram katha in Hindi-जानिए परशुराम और गणेश युद्ध की कथा क्या है ?

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आज हम आपको सुनाने जा रहे है एक ऐसे कथा जिसके हमारे ग्रंथो मे भी सबूत मिलते है । एक समय की बात है। महर्षि परसुराम अपने गुरु महादेव से मिलने गए थे ।महादेव ने परशुराम को अपना पुत्र व् शिष्य स्वीकार किया था ।जब परशुराम भगवन शिव

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आज हम आपको सुनाने जा रहे है एक ऐसे कथा जिसके हमारे ग्रंथो मे भी सबूत मिलते है । एक समय की बात है। महर्षि परसुराम अपने गुरु महादेव से मिलने गए थे ।महादेव ने परशुराम को अपना पुत्र व् शिष्य स्वीकार किया था ।जब परशुराम भगवन शिव से मिलने पहुंचे ।तब शिव तपस्या कर रहे ,इसीलिए भगवन शिव के पुत्र गणेश ने परशुराम का मार्ग रोक दिया । परशुराम जन्म से ब्राह्मण है।

parshuram story

परशुराम के क्षत्रिय धरम का पालन किया था ।ऐसी वजह से जब गणेश जी ने भगवन परशुराम का मार्ग रोका तब उनको क्रोध आ गया था ।
उन्होंने यह नहीं सोच सामने भगवन शिव के पुत्र है । भगवन शिव से प्राप्त अमोध फरसे से गणेश जी पर प्रहार कर दिया । उनका एक दांत का टुकड़ा टूट गया ।
तब गणेश जी ने देखा परशुराम जी ने पिता जी द्वारा दिए गए फरसे का मान रखते हुए अपने एक दांत पर धारण कर लिया।

parshuram and ganesh

उस फरसे के प्रभाव से । एक गणेश जी एक दांत भूमि पर गिरा । तब हिमालय पर्वत काँप उठा।हिमालय पर माँ दुर्गा वहां पर प्रकट हो गयी। माँ दुर्गा अपने संपूर्ण रूप मे आ गयी ।उन्होंने परशुराम से कहा भार्गव मेरा यह पुत्र श्री कृष्णा का अंश है ।इस कारन से सभी से पहले इसकी पूजा पहले होती है । ये तुम जैसे लाखो को दंड दे सकता है।

maa durga

माँ दुर्गा परशुराम को मारने के लिए तैयार हो गयी । परशुराम भी भयभीत हो गए । परशुराम मन ही मन भगवान श्री कृष्णा का ध्यान करने लगे ।
भगवान श्री कृष्णा का स्मरण करने लगे ।भगवन शिव भी वहां पर आ गए । देवी को समझने लगे । देवी दुर्गा नहीं मान रही थी । उसी समय एक बोना ब्राह्मण वहां पर आ गया ।

bhagwan shiv

भगवान शिव उस बालक को देखकर बहुत प्रसन्न हो गए । शिव उसकी पूजा करने लगे । सभी लोग आश्चयचकित रह गए ।शिवजी इस बालक की पूजा क्यों कर रहे है ।भगवान शिव ने सबसे कहा ये स्वम भगवन विष्णु है । भगवन विष्णु के रूप उस बालक की सभी ने पूजा करि ।बालक ने माँ दुर्गा से कहा माँ जैसे ये कार्तिकेय आपका पुत्र है ,गणेश आपका पुत्र है ,मे भी आपका पुत्र हूँ ।

bhagwan vishnu vaman avtar

वैसे ही परशुराम आपके ही पुत्र है ।खेल खेल मे दो भाइयो मे लड़ाई हो जाती है । कोई भी माता ऐसा कठोर दंड नहीं देती ।आप परशुराम को क्षमा कर दीजिये । माता का गुस्सा शांत हुआ । उन्होंने परशुराम जी को क्षमा कर दिया ।

parshuram avatar

बामन ने परशुराम जी को आज्ञा दी ,वह गणेश जी के टूटे हुए दन्त को अपने पास रखे सदैव उस दांत की पूजा करे । उस समय परशुराम जी ने माता से ,शिवजी से ,गणेश से अपने कोध के लिए क्षमा मांगी।
भगवन बामन को नमन किया । परशुराम जी वह दांत लेकर चले गए । इस प्रकार से माँ दुर्गा के उस रौद्र रूप से परशुराम जी की रक्षा हो गयी ।

Ekdanta

उस दिन के बाद से ही भगवन गणेश जी को एकदन्त के नाम से जाने जाना लगा ।