narmadeshwar shivling-जानिए नर्मदेश्वर शिवलिंग की महिमा

narmadeshwar shivling

हम सब जानते है भगवान् शंकर की हम पूजा करते है। एक लोटा जल से वो प्रश्न रहते है।और वही कलयुग में भी विषेस फल भी इसका बताया गया है।की मात्र कोई भी आपकी मनोकामना है आप भगवान् शंकर के पास जाए तो अवश्य ही वो आपकी मनोकामना पूर

narmadeshwar shivling

हम सब जानते है भगवान् शंकर की हम पूजा करते है। एक लोटा जल से वो प्रश्न रहते है।और वही कलयुग में भी विषेस फल भी इसका बताया गया है।की मात्र कोई भी आपकी मनोकामना है आप भगवान् शंकर के पास जाए तो अवश्य ही वो आपकी मनोकामना पूर्ण करेंगे।तो ऐसे में ही सुसम कथा में आपको बता दूँ की हम बात कर रहे है नर्मदेश्वर शिवलिंग की।सब से पहले नर्मदेश्वर शिवलिंग कहा से उत्पन हुए।भगवान् भोले नाथ के गानों में और उनके भगतो में सब से उत्तम भक्त बाणासुर को बताया गया है।

Shree Krishna

दुवापर युग में श्री कृष्ण दुवारा उसको अभय दान प्राप्त हुआ है।कथा इस प्रकार से है की बाणासुर भगवान् शिव का अनन्य भक्त था।वह ब्रामणो दुवारा प्रति दिन सहस्त्र हज़ार शिवलिंग बना कर बाण लिंग बना कर ब्रामणो दुवारा पूजन करवाता था और विधि विधान पूर्वक भगवान् शिव की पूजा वह खुद करता था और सदैव भगवान् शिव के चिंतन में ही वह रहता था।वह और किसी को भगवान् मंटा ही नहीं था।भगवान् उससे प्रश्न थे और उसको वरदान भी ये दिया था की तम्हारी सहस्त्र हज़ार भुजाएं हो और तम्हारा बल भी तम्हारी भुजाओ के बराबर हो तभी वो इतना गमंडी हो चूका था की वह कई बार भगवान् शिव से ही बोल देता था की में आपसे ही युद्ध करना चाहता हूँ ।

Krishna

कल्याण करि होते है।वह उनको समझते थे की एक समय आएगा जब तम्हे असल में ये ज्ञात होगा की परम् पिता परमेश्वर कोण है।में तम्हारा परम पिता परमेश्वर नहीं हूँ ।स्पष्ट रूप से वो बताते थे की भगवान् श्री कृष्ण को तम्हे पूजना चाइये ल्व्कीन वो कहता था में उस कृष्ण को क्यू पुजू जो दर दर की ठोकर खा रहा है कभी वो मथुरा में था कभी वो विरिन्दा वन में था कभी वो दुवारिका चला जाता है।या कभी वो गायब ही हो जाता है।तो में उसे क्यू मनु।

Bhagvan shree Krishna

ऐसे में ही एक समय भगवान् श्री कृष्ण और बाणासुर के बिच युद्ध भी हुआ।तो भगवान् शिव को बाणासुर की तरफ से खुद युद्ध में समलित होने आना पड़ा।भगवान् श्री कृष्ण ने एक ही बाण से भूत भावन भोले नाथ को निद्रा में सुला दिया अर्थात उनको सुला दिया एक ही बाण सेऔर उस बीच उन्होंने बाणासुर के भुजाओं को अमनिया करना प्रारम्भ कर दिया।अमनिया अर्थार्थ करना प्रारम्भ कर दिया।वह एक एक उनकी भुजाएं काट रहे थे अपने सुदर्शन चक्र से जैसे ही बाणासुर की चार भुजाएं बची वैसे ही भगवान् शिव को चेतना आ गई ।

Shiv pooja

वह भगवान् श्री कृष्ण के आगे सस्टांग हो कर दंडवत हो कर उन्होंने उनसे प्राथना करि की आप मेरे भक्त को अवदान प्रदान करे इसको छोड़ दे आप यह अज्ञानी है।और ये नहीं जनता है आपके ऐस्वर्य को भगवान् कृष्ण सांत हुए उन्होंने अभयदान बाणासुर को दिया और यह भी कहा की अब ये तो सक्सरत चार भुजाओं वाला हो गया है तो ये हमारा परसद भी हो गया है।तो इसी लिए तब से पराम् गति उसको प्राप्त हुई और प्रलाद जी के वन्सजो में से एक था बाणासुर।ये भगवान् की लीला ही होती है उसे भयदान प्रदान करा और आज भी भगवान् शिव की पूजा में बाणासुर रावण इत्यादि का नाम अवस्य अत है।

narmadeshwar shivling price

नर्मदेश्वर शिवलिंग आप हमारी वेबसाइट से प्राप्त कर सकते है।

narmadeshwar shivling pooja

जब तक इनको भोग न लगाए तब तक भगवान शिव भी भोग ग्रहण नहीं करते है।या रुद्रा अभिषेक रूद्री में अस्पस्ट रूप से मन्त्र भी अत है।इस प्रकार से ये कथा है।तो हम बात कर रहे थे नर्मदेश्वर शिवलिंग के विषय में यह कथा मेने आपको इस लिए बताई की वह जो पूजन करता था बाण लिंग बना कर उनको वह नर्मदा नदी में प्रवाहित करता था और जैसे ही नर्मदा नदी का स्पर्श वो बाण लिंग करते थे।

narmadeshwar shivling benefits in hindi

वह नर्मदेश्वर के रूप में वह हो जाते थे ऐसा मन जाता है की कोई भी वेक्ति अगर नर्मदेश्वर शिवलिंग को अपने घर में लेकर नित्ये पूजन करे तो उनके जनम जनमतन की पाप के चैये होते ही है ।भगवान शिव की विशेष कृपा साथ ही साथ भगवान् विष्णु की भी विशेष कृपा उसे प्राप्त होती है क्योकि वह बाणासुर जिस प्रकार से भगवान् शिव ने अभय दान दिया था वही भगवान् श्री कृष्ण ने भी उसे अभय दान दिया था ।इसी लिए इस नर्मेदेशवेर शिवलिंग का विशेष महत्वा है ।

lord krishna mantra-जानिए भगवन कृष्णा मंत्र

Shree Krishna

आज हम बात करेंगे भगवान श्री कृष्णा के उस दिव्या मंत्र के बारे मे ।जिसके उच्चारण मात्र से भगवन श्री कृष्णा के दर्शन भी कर सकते हो ।ऐसा मे नहीं कह रहा हु ।ऐसा भगवत श्री पुराण मे भी लिखा हुआ है । जो भी व्यक्ति भगवान की शरणागति

Shree Krishna

आज हम बात करेंगे भगवान श्री कृष्णा के उस दिव्या मंत्र के बारे मे ।जिसके उच्चारण मात्र से भगवन श्री कृष्णा के दर्शन भी कर सकते हो ।ऐसा मे नहीं कह रहा हु ।ऐसा भगवत श्री पुराण मे भी लिखा हुआ है । जो भी व्यक्ति भगवान की शरणागति प्राप्त करता है । भगवान उसको अपनी शरण मे ले लेते है।अपने कई दन्त कथाये सुनी होगी ।

krishna bhajan hindi

हमने बहुत जगह पर भगवन श्री कृष्णा की शक्ति को देखा है ।अगर आप भी निष्ठा भाव से भक्ति से परिपूर्ण होकर कार्य करते है ।एक दिन भगवान आपको जरूर दर्शन देंगे ।वैष्णव सम्प्रदाय यह मानते है । अगर पूर्ण रूप से भगवान की भक्ति करि जाये । भगवान हमें गले से लगा लेते है ।भगवन बस इंतजार कर रहे होते है ।आपके एक कदम के आने बढ़ने के लिए ।आप इस मंत्र का जाप करे ।

shree krishna sharanam

श्री कृष्ण शरणम ममः
श्री कृष्ण शरणम ममः, अर्थात मेरे लिये श्री कृष्ण ही शरण हैं, रक्षक हैं, आश्रय हैं, वही मेरे लिये सर्वस्व हैं। मैं दास हूं, प्रभु मेरे स्वामी हैं और मैं आपकी शरण में हूँ। इस भावना से दीनता बनी रहती है, तथा अहंकार का उदय नही होता ।इसके जाप मात्र से आप सात्विक प्रवत्ति मे आ जायेंगे ।आपका मन हर स्तिथि मे शांत रहेगा ।

krishna mantra for success

अपने देखा होगा भगवा धारण करने के बाद वो भगवन को समर्पित कर देता है ।हर दिन मे 11 माला जाप जरूर करे । हमें यह बात जरूर ध्यान रखना चाहिए ।हमारा अंतिम लक्ष्य भगवान की प्राप्ति है ।हम जन्म तो ले लेते है । हम इतने व्यस्त हो जाते है । भगवन का नाम लेना जरूर भूल जाते है ।आप अपनी अंतरात्मा के लिए समय नहीं दे पाते है ।अपनी आत्मा को जाग्रत कीजिये ।आपको कोई कास्ट नहीं होगा। हर कोई प्रसन्न रहेंगे ।

krishna mantra katha

हमने बहुत सारी कथाये सुनी है ।जिसमे भगवान परमहंश को श्री कृष्णा की प्राप्ति हुए थी ।

krishna gayatri mantra-जानिए कृष्णा गायत्री मंत्र क्या है ?

Shree Krishna

भगवन कृष्णा का यह गायत्री मंत्र इतना विशेष ,इतना सरल,गूढ़ है । अगर कोई भी व्यक्ति इसका जाप करता है ।उसकी कृष्ण मे प्रीती बढ़ती है। माँ गायत्री के आशीर्वाद से उसको कृष्ण के दर्शन भी हो सकते है । इसका निरंतर उसका जाप करता है।

Shree Krishna

भगवन कृष्णा का यह गायत्री मंत्र इतना विशेष ,इतना सरल,गूढ़ है । अगर कोई भी व्यक्ति इसका जाप करता है ।उसकी कृष्ण मे प्रीती बढ़ती है। माँ गायत्री के आशीर्वाद से उसको कृष्ण के दर्शन भी हो सकते है । इसका निरंतर उसका जाप करता है।

Bhakt katha

आपके अंदर एक ऐसे ऊर्जा का संचार होगा ।जिस से आप इस सांसरिल जगत मे रहते हुए भी भगवन का साक्षात् दर्शन भी कर सकते है ।इस कलयुग मे कई ऐसे उदाहरण हमारे पास है ।आपने भक्त माल कथा के बारे मे सुना होगा ।भक्त माल कथा मे भक्तो को कब किन किन परिस्थितियों मे दर्शन हुए है।

Gayatri mantra

चाहे वो गृस्थ थे ,चाहे वो संत,ब्राह्मण ,साधु थे। उनको भगवन के प्रतिदिन दर्शन होते थे । ऐसा वृंदावन धाम मे हरिदास महाराज द्वारा स्थापित करी गयी। श्री वृंदावन बिहारी लाल की दिव्य प्रतिमा न होकर ठाकुर जी वह पर विराज रहे है। ऐसा भाव इस मंत्र के द्वारा आपके अंदर जरूर जरूर हो जायेगा। भगवन श्री कृष्णा के इस गायत्री मंत्र का जाप आप अवस्य करे। आप भगवान श्री कृष्णा के इस गायत्री मंत्र का जाप अवस्य करे। गायत्री मंत्र 24 देवी देवताओ मे से भगवान श्री कृष्णा भी आते है ।वो आपको विष्णु रूप से श्री कृष्णा रूप मे प्राप्त हुए है ।भगवान ने इस रूप मे अपने ऐश्वर्य को साक्षात् प्रदर्शित किया है।

Geeta gyan

गीता का ज्ञान भी आपके समक्ष है । भगवन श्री कृष्णा ने जीवन के बारे मे गीता मे सब कुछ बताया है। जिसमे अर्जुन को अपने मुख से बताया ।वह बात जन जन को श्री वेद व्यास जी दवारा महाभारत करत मे हमें प्राप्त हुए । आज उसी के सहारे हमारे देश मे माने जाने वाली श्री मद भगवद गीता इतनी प्रसिद्ध है। किसी भी धरम के बड़े बड़े व्यक्ति भगवद गीता के उस ज्ञान को अवश्य मानते है ।भगवान कृष्णा द्वारा यह दिया गया उपदेश है ।

krishna gayatri mantra

इस मंत्र का आप ऐसे जाप करे ।
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात्।

krishna gayatri mantra benefits

ये माँ गायत्री और भगवान श्री कृष्णा का सम्मलित मंत्र भगवान से प्रीती बढ़ायेगा। आपके अन्दर ऐसे भक्ति का उजागर ये करेगा। जिसके कारन आप स्पस्ट रूप से भगवान के दर्शन कर सकते है। आप तुलसी की माला से आप भगवन का जप करे। विधि इस प्रकार है।

Bhagvan surya

भगवान सूर्य को सुबह उठकर अर्ग प्रदान करे।किसी भी गुरुवार को इस मंत्र का जाप करना शुरू कर दे। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु का दिन कहा जाता है। भगवन श्री कृष्णा और विष्णु जी को आदिदेव कहलाये गए है। दोनों का ध्यान करते हुए। इस मंत्र का जाप करे ।

Maa gaytri

गायत्री से आग्रह करे। हे माँ गायत्री हमारे कंठ मे स्थित रहे ।जिसके कारण भगवान की भक्ति मे लीन होकर इस मंत्र का जाप करे सके।